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हम्मर पहिचान कैसे बचाइ ?

2026-04-11 07:42:00
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आझ ठाेरिकुन अपना बिचार साझा करत आहुँ ।

हमरे कठरिया हुइ, हम्मर अपना सँस्कृति आउ अलग्गे पहिचान आहे । मुल यहके बचाइ सकब तब किल हमरे कठरिया पहिचान सहित के अपना समुदाय केहेँ चिन्हाइ सकब । हम्मर पहिचान केहेँ बचाइ तहन का करक परि ? आझ यिहि बिषय मेँ कुछ बात लिख्नामन लागल।

हम्मर पहिचान बचाइक तहन हम्मर सबका भुमिका का हुइना चाही ?
पहिचान केवल हम्मर अपना नाम, जाति या भाषा मेँ किल सिमित नाइ रहता । यि ते हम्मर जड आहे, संस्कृति परम्परा आउ जीवनशैली ति जुडल रहता । आज के बदलत युगमें आधुनिकता बहुते जाेड ति फैलत जाईत आहे । अइसने करके बदलति जाइते, हम्मर अपना कठरिया सँस्कृति आउ, संस्कार, पहिचान, माैलिकता फेकुन हिराजाइ जैसन लगता । यि बिषय बहुते चिंताके बिषय आउ चुनाैति फेकुन हुइगेल आहे । यी सब बचाइक तहन अब हमके कुछ साेँचबिचार करके अपना कठरिया पहिचान, कठरिया समुदाय के तहनि काम करे परना आहे

१. अपना कठरिया भाषा केहेँ बचाइ परना बहुते जरुरि आहे !

 

भाषा हम्मर संस्कृति के आत्मा आहे। यदि हमरे अपना मातृभाषा (कठरिया भाषा) मनकना छोड़ दहब ते तउ, अइना वाला हम्मर नयाँ पिढि अपना भाषा अक्कु नाइ मनके जनहीँ आउ अपना पहिचान ती हिराजिहिँ । यहका तहनी का करे परि ?

घर-परिवार में मातृभाषा (कठरिया भाषा) के प्रयोग करि ।

बच्चा भरिन अपना कठरिया भाषा मनकना सिखाइ ।

️ अपना घरका लरका बच्चा भरिन कठरिया भाषा में कहानि, बारता, जनाैनिँ, गीत, कविता सुनैना काम करि ।

२. हम्मर कठरिया पुरान संस्कृति आउ परम्परा केहेँ अपना के चलि !

हम्मर कठरिया समुदायके अपना पुरान भेषभुषा, पहिरन, पुजनाैर, वेह, मरनिकरनि, खानपान, नाँचगान, गीत आउ पबनि केहेँ बचैना काम करि । यहके बचाइक तहन का करि ?

️ हम्मर कठरिया पबनि केहेँ पुरान परम्परा आउ पुर्खानि रित अनसार मनाइ !

कठरिया समुदायके लोकगीत, हाेरी नाच, साथे आकु नाँचगान कठरिया पहिरन लगाके हम्मर गाउँघर के स्कुल मेँ, आउ गाउँघर, वडा, पालिका, मेला महाेत्सव मेँ हुइना कार्यक्रम मेँ प्रस्तुत करके दिखाइ ।

३. स्थानीय ज्ञान आउ जीवनशैली केहें संरक्षण करि !

हम्मर पुर्खा भरिन तिया पुरानी बैदबा, चिकित्सा बारे, साथे प्रकृति, जल संरक्षण के बारेमें बहुते ज्ञान, सीप, अनुभव रेहे । उ हम्मर पुरानी सम्पत्ति आहे। यहके बचाइक तहनि का करि ?

️ पुरान परम्परा, ज्ञानसीप बारे पुर्खा भरिन ति सल्लाह लैके पुरानी शैली अनसार परंपरागत जडिबुटि के प्रयाेग आउ संरक्षण करि ।
️ पुरान पुर्खा भरिन के अनुभव, ज्ञान सीप केहेँ दस्ताबेजिकरण करके धरि । पुरान गीतबास जस्ते कि, बेहु गीत, बन्ना हाेरी नाँच गीत, डफ गीत, पचैँया में गइना गीत, पुरानि कहानी आउ बरता, अस्ते करके आकु पुरानि चिज केहेँ लिख के या अडियो/वीडियो में रेकर्ड करके धरना काम करि ।

४. नयाँ पुस्ता (लरकाबच्चा) भरिन सँस्कृति प्रबर्द्धन में सामेल करैना !

अगर युवालरका भर अपना पहिचान केहेँ नाइ सम्झहिँ ते हम्मर कठरिया सँस्कृति, पहिचान संरक्षण करना असंभव रिहि। यहका तहनि का करब ते मजा रिहि?

️ लरका बच्चा भरिन आउ युवा लरकन और हम्मर कठरिया संस्कृति पर आधारित कार्यशाला, प्रतियोगिता या सांस्कृतिक नाटक, गीत, भिडियो, कठरिया पहिरन प्रदर्शनी प्रतियोगिता जैसन कार्यक्रम में सहभागी कराइ ।

सोशल मीडिया के माध्यम ती अपना कठरिया संस्कृति के प्रचार करि, जैसेकि — फेसबुक Reels, Tiktok reel, youtub reel, Instagram reel, कठरिया भाषा के blogs, भिडियो Vlog, podcasts, कठरिया गीत संगीत, अनलाइन रेडियो कार्यक्रम ।

५. सामूहिक एकता बनाइ !

हम्मर सँस्कृति आउ पहिचान एक मनैक किल नाइ आहे । यि ते हम्मर साझा सम्पति आहे । जब हमरे सक्कु कठरिया समुदाय मिलके साथ चलब आउ अपना अपना गाउँ ठाउँ ती लागब ते जरुर हम्मर पहिचान बचि आउ बलगर फेकुन रहि ।
यहका तहनि का करले ती मजा रिहि ?

️ समुदाय आधारित संगठन,संस्था केहेँ बलगर बनाइ । कठरिया गाउँ मेँ क्लब या संस्था बनाइ साथे पुरान रहल संस्था , क्लब केहेँ साथ सहयाेग, समर्थन करके आगे बढाइ । कठरिया भाषा के गीत, संगीत निकर्ना मेँ संगठन बनाइ । सामाजिक काम करैया कठरिया युवा भरिन मान, सम्मान के कार्यक्रम करि । कठरिया समुदाय के बन्ना पवनि, खास पवनि, पुजनाैर केहेँ सबजना मिल के मनाइ साथे कठरिया सँस्कृति, पहिचान केहेँ सबकेहेँ दिखाइक तहनि, प्रचार, प्रसार करक तहनि दिवस या भाषा दिवस के रुप में कार्यक्रम करना जरुरी आहे ।

 लेखक : जनक कठरिया (जे.के)

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